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Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

Air India के घर वापसी पर विमान अपने पूर्ण सोंद्रय रूप में सब को मोहित करता हुआ

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा के प्रेम की शुरुवात

Air India के घर वापसी, एक रोमांचक प्रेम कहानी के हीरो जहांगीर ने पढाई के साथ साथ फ्रेंच सेना की लाइट आर्टलरी में सिपाही के तौर में भर्ती हो गए। अपने पिता के एक करीबी दोस्त लुइस चार्ल्स जो पेशे से इंजीनियर थे। जो हवाई जहाज के बेहतरीन पायलट थे। और आगे चल कर पहले इंसान जिन्होंने चैनल पार किया था , से बड़ा प्रभावित होते थे। मनो किसी ने उन के सपनो में रंग भर दिए हों।
साल उन्इस सौ उनतीस में पिता के कहने पर फ्रांस की नागरिकता छोड़ कर वह हिनुस्तान वापिस आगये और हिंदुस्तान में रहकर पारसी धर्म और उनके संस्कार का हिस्सा हो गए। अगले साल इस नौजवान की के जीवन में एक सूंदर शहज़ादी थेल्मा से विवाह होना सम्पन हुआ। अब हमारी कहानी के हीरो जहांगीर रतन जी को एक सूंदर हीरोइन का साथ मिल गया था। कुछ समय बाद सन उनीस सौ चौंतीस में उन्होंने टाटा संस के प्रमुख के रूप में साथ जुड़ गए।

Air India के घर वापसी एक प्रेम कहानी, हिदोस्तान की आजादी से पहले की है जो शुरू होती है एक पारसी जोशीले नौ जवान युवक की, जिसके जूनून में आसमान में उड़ने की खवाइश थी. जिसके सपने बादलों से बातें करते थे ,
इस दीवाने नौजवान का नाम जाह्गीर रतनजी दादा भाई था। इनका जनम उनतीस जुलाई उनीस सौ चार में टाटा परिवार के श्री रतन जी भाई और उन की फ्रेंच पत्नी सुज़ाने ब्रेयर के घर हुआ था। लोग कहते हैं की टाटा शब्द गुजरती शब्द टमटा से निकल कर आया है जिस का मतलब कुछ तेज या तीखा होता है।

इनकी माता फ्रांस की रहने वाली थी। सो इनकी पढाई जैनसन डी साईली स्कूल पेरिस में हुई थी। घर में वह केवल फ्रेंच भाष ही बोलते थे थे सो इन की मात्र भाषा फ्रेंच ही बन गई। आगे चल कर वो लंदन जापान और बॉम्बे भी पढ़ने गए। इन के पिता रतन जी भाई, जो रिश्ते में जमशेद जी भाई के भतीजे लगते थे। जिन्होंने जमशेद जी भाई के बाद टाटा कारोबार की कमान अपने हाथ में संभल ली थी। । कुछ समय बितने पर की उनकी पत्नी चल बसी। रतनजी भाई अपने परिवार के साथ फ्रांस छोड़ कर हिंदुस्तान आगये। और अपने बेटे Air India के घर वापसी के हीरो जहांगीर को इंजीनिरिंग की पढ़ाई करने ग्रामर स्कूल में पड़ने लंदन भेज दिया।

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

अपने हवाई जहाज के साथ एक मशूकाना अंदाज में तस्वीर लेते हुए। फिर जी चाहता है। उन                                           गलिओं से गुजर जाने को जहां बचपन में मुहब्बत हुई थी।

Air India के घर वापसी के हीरो जहांगीर रतन जी का बादलों में उड़ने के सपने का अब साकार होने का समय आगया था। उन्होने रॉयल एयर क्लब से हवाई जहाज उड़ाने का पर्शिक्षण लिया और उस दौर ज़माने में हिंदुस्तान के पहले कमर्शियल पायलट बने। यहाँ से फिर कभी न ख़त्म होने वाला जूनून शुरू होता है। उस दौर में लंदन से इम्पीरियल हवाई सेवा के जहाज कराची शहर जो अब पाकिस्तान में है, तक डाक लेकर आया करते थे । हमारे हीरो जहांगीर की कारोबारी सोच और शौक दोनों को जोड़ते हुए अपने एक मित्र नैवेल विसेंट के साथ मिलकर उन्होंने उस वक्त में दो लाख रूपए देकर , बरतानिया हुकूमत को दो लाख रूपए दे कर कराची से बॉम्बे आज का मुंबई और अहमदाबाद तक हवाई डाक सेवा का कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया।

यहाँ Air India के घर वापसी के नौजवान  हीरो जहांगीर रतन जी के शौक ए खवाबों तामीर हुई और एक समय में दुनिया की मशहूर ए जमाना Air India का जनम हुआ। यहाँ दो पायलट तीन इंजीनियर और चार चौकीदार खलासी के साथ उन्होंने टाटा एयर मेल की शुरूवात की। ये साल उनीस सौ बत्तीस का दिन पंदहरा अक्टूबर का था। हमारे हीरो जंगीर ने पहली हैवीलैंड डी पूस विमान में कराची के दरिगह हवाई पट्टी से उड़ान भरी और दो पंखों वाले हवाई जहाज को पंजाब के खेतों, राजपुताना के रेगिस्तानों और गुजरात के कच और नीले समंदर को देखते हुए मुमबई के समुन्दर के किनारे की हवाई पट्टी पर लैंड की। आज उन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।

अपने विमान के साथ खड़े होकर उन्होंने कई तस्वीरें ली जो उन के रोमांच में चार चाँद लगाती हैं। अब उनके जोश ने एक और करवट ली और उन्होंने डाक सेवा के साथ इंसानो को भी अपनी हवाई सेवा में जोड़ लिया। इस कारोबारी सोच के चलते उन्होंने उनइस सौ अठतीस के आते आते पहली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान भरी और यह उड़ान मुमबई से उड़ते हुए हिंदमहे सागर को पार करते हुए श्री लंका में उतारी। अब टाटा एयर मेल ने दूसरे विश्व युद्ध से विराम करते हवाई जहाज सस्ते दामों पर खरीद कर एक नया नाम दिया टाटा एयर लाइन्स।

Air India के घर वापसी एक प्रेम कहानी, हिदोस्तान की आजादी से पहले की है जो शुरू होती है एक पारसी जोशीले नौ जवान युवक की, जिसके जूनून में आसमान में उड़ने की खवाइश थी. जिसके सपने बादलों से बातें करते थे ,
इस दीवाने नौजवान का नाम जाह्गीर रतनजी दादा भाई था। इनका जनम उनतीस जुलाई उनीस सौ चार में टाटा परिवार के श्री रतन जी भाई और उन की फ्रेंच पत्नी सुज़ाने ब्रेयर के घर हुआ था। लोग कहते हैं की टाटा शब्द गुजरती शब्द टमटा से निकल कर आया है जिस का मतलब कुछ तेज या तीखा होता है।

इनकी माता फ्रांस की रहने वाली थी। सो इनकी पढाई जैनसन डी साईली स्कूल पेरिस में हुई थी। घर में वह केवल फ्रेंच भाष ही बोलते थे थे सो इन की मात्र भाषा फ्रेंच ही बन गई। आगे चल कर वो लंदन जापान और बॉम्बे भी पढ़ने गए। इन के पिता रतन जी भाई, जो रिश्ते में जमशेद जी भाई के भतीजे लगते थे। जिन्होंने जमशेद जी भाई के बाद टाटा कारोबार की कमान अपने हाथ में संभल ली थी। । कुछ समय बितने पर की उनकी पत्नी चल बसी। रतनजी भाई अपने परिवार के साथ फ्रांस छोड़ कर हिंदुस्तान आगये। और अपने बेटे Air India के घर वापसी के हीरो जहांगीर को इंजीनिरिंग की पढ़ाई करने ग्रामर स्कूल में पड़ने लंदन भेज दिया।

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

उस दौर में, हवाई जहाज में रहीस सफर किया करते थे। और एयर होस्ट्रेस्स का जलवा किसी फ़िल्मी                          हेरोइन से काम नहीं था

जहांगीर रतन जी ने अपनी टाटा एयरलाइन्स का विस्तार देखते हुए अपनी कंपनी को पब्लिक कर दिया यानी अब आम लोग पैसा लगा कर इस कंपनी के हिस्सेदार बन सकते थे। यहाँ से टाटा एयरलाइन्स का सुनहरा दौर शुरू होता है। फिर टाटा एयर लाइन्स के विमान लंदन फ्रांस और कई देशों के आसमानो में उड़ान भरने लगे। पचास के दशक में जब देश में आर्थिक संकट था उस दौर में भी टाटा एयर लाइन्स दुनिआ जहाँ में बेहतरीन एयर लाइन्स मणि जाती थी। ये था जहांगीर रतन जी टाटा का जोश और मेहनत का नतीजा । एविएशन से जुड़े लोग बताते हैं की टाटा की विमान सेवा, एयर होस्ट्रेस्स आराम दायक इंटीरियर आगे चल कर और देशों की हवाई सेवा के लिए मिसाल बनी। उनकी जीवनी लिखने वाले लाला बताते हैं की हवाई जहाज की कुर्सिओं का आराम से लेकर खिड़कियों के परदे और खाना परोसने के लिए कटलरी का भी चुनाव वो खुद किआ करते थे। एक किस्सा बड़ा मशहूर है , एक बार जिनेवा शहर के एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति से समय पूछा तो पहले वयक्ति ने खिड़की से बाहर डेक कर बताया की गयारह बजे हैं। दूसरा व्यक्ति बड़ा हैरान हुआ , पूछने पर बताया की देखो Air India एयर इंडिया का जहाज लैंड हुआ है. वो हमेशा अपने ठीक गयारह बजे के समय पर ही लैंड होता है।

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

ये वही मिसाल की कहानी का अगला कदम था। जो जमशेद जी टाटा से शुरू हुआ था। किस्सा कुछ यूँ था की एक बार जमशेद जी भाई अपने एक विदेशी मेहमान को लेकर बम्बई में उस दौर के मशहूर रेस्टोरेंट में खाना खिलने ले गए जैसे ही वो दरवाजे पर पहुंचे ,दरबान ने उन दोनों का अभिनन्दन करते हुए कहा की आप जमशेद जी भाई टाटा एक हिंदुस्तानी हो ,कारण इस रेस्टोरेंट में प्रवेश नहीं कर सकते यहाँ केवल विदेशी मेहमान ही आ सकते हैं। बात आई गई हो गई पर टाटा परिवार अपने गुस्से और जूनून को कहाँ छोड़ सकता था। बस तो जमशेद जी बाई ने उस के सामने एक और बड़ी लकीर खेचते हुए समंदर की लहरों को देखते हुए अपने ज़माने का खूबसूरत और आलिशान होटल ताज महल बनवाया था। जिस का नाम आज भी दुनिया के बेहतरीन होटलों में शुमार है।

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मुंबई में समंदर किनारे के बना आलिशान ताज महल होटल

जहांगीर रतन जी ने चौंतीस साल की उम्र में पुरे टाटा कारोबार की बागडौर अपने हाथों में संभल ली थी। अपने कर्मचारियों का खास धयान रखने के कई किस्से उनके जीवनी कार रहे लाला जी बताते हैं। जहांगीर रतन जी टाटा का रोमन ग्रीक इतिहास में , पेंटिंग और फूलों के साथ सूंदर औरतों में भी बडा रुझाव था। उनकी कोई औलाद न होने पर वह हमेश खुश जिंदगी जीने में मिसाल थे।

नेहरू के दौरे ए हिंदुस्तान में निति आयोग ने सभी हवाई विमान कंपनियों का एकीकरण करने की योजना बनाई। जिस के तहत Air India एयर इंडिया  इंटरनेशनल अब एक सरकारी विमान निगम बन गई थी। इस बात को लेकर जहांगीर रतन जी भाई टाटा बहुत नारारज हुए। और नेहरू जी से एक सम्मलेन में भोजन करते समय अपनी नाराजगी का इज़हार ओ नाराजगी की। नेहरू जी ने उन्हें बड़े प्यार के साथ , हिंदुस्तान के भविष्ये को लेकर अपना नज़रिया समझायाऔर देश की तरक्की और मजबूती का वास्ता दिया। जहांगीर रतन जी को अपने शौक से जुड़े रहने के लिए एयर इंडिया का चेयरमैन बना दिया। यह पद उन्होंने बिना किसी तनख्वाह के लिए बिना ,अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ करते रहे। कहते हैं मुहब्बत करने वालों ने कब दौलत ओ ज़माने की परवाह की है। उन के होये हुए Air India एयर इंडिया भारत सरकार के ख़ज़ाने को अपने मुनाफे में इजाहफे से भरने लगी । Air India के घर वापसी कहानी के प्रेमी जहांगीर रतन जी ने अपनी हर वक्तव्य में नेहरू जी की देश और राज निति के समबन्ध में तारीफ ओ जिक्र भी किया है।

Air India के घर वापसी और जहांगीर टाटा की प्रेम कहानी

सन सत्ततर में समय ने फिर एक करवट ली और देश मोरारजी देसाई जी के हाथों में आगया। बिना बताये जमशेद जी को उन के पद से निकल दिया। यहाँ हमारे हीरो जहाँगीर भाई टाटा से उनके दिल के अजीज खिलोने को उन से जुदा कर दिया गया। एविएशन में रूचि रखने वाले बताते है की यहीं से  Air India के घर वापसी कहानी में मुनाफे के पावँ डगमगाने लग गए थे। जो फिर शायद कभी संभल नहीं पाए। लोग बताते हैं की प्रफूल पटेल जी के समय में कुछ नीतियां ऐसी बनाई गयी जिस के चलते एयर इंडिया वेंटिलेटर पर आगयी। और फिर कभी उस की सांसें सामने नहीं हो पायी। फिर एयर इंडिया ने कभी मुनाफे की ख़ुशी नहीं देखी। और अपने साजन की याद में अपने घाटे के आंसू बहती रही। जहांगीर रतनजी की कमान में टाटा परिवार ने कई उद्योगों की स्थापना की और भारत की उत्पाद क्षमता को बढ़ाने में अपना योगदान दिया। भारत में कई प्रोग शालाएँ शुरू की। और अपने कथन को अंजाम दिया ” टाटा जिस चीज़ को हाथ कागते हैं उसे भरोसे की चीज़ बना देते हैं ” जब भी उन्होंने मिडिया के सामने रूबरू हो टाटा परिवार की क़ाबलियत का जिक्र किया वहां-वहां अपनी माशूक एयर इंडिया का जिक्र जरूर किया है। शायद उसे वो कभी दिल से कभी भुला नहीं प

Air India के घर वापसी एक प्रेम कहानी, हिदोस्तान की आजादी से पहले की है जो शुरू होती है एक पारसी जोशीले नौ जवान युवक की, जिसके जूनून में आसमान में उड़ने की खवाइश थी. जिसके सपने बादलों से बातें करते थे ,
इस दीवाने नौजवान का नाम जाह्गीर रतनजी दादा भाई था। इनका जनम उनतीस जुलाई उनीस सौ चार में टाटा परिवार के श्री रतन जी भाई और उन की फ्रेंच पत्नी सुज़ाने ब्रेयर के घर हुआ था। लोग कहते हैं की टाटा शब्द गुजरती शब्द टमटा से निकल कर आया है जिस का मतलब कुछ तेज या तीखा होता है। इनकी माता फ्रांस की रहने वाली थी। सो इनकी पढाई जैनसन डी साईली स्कूल पेरिस में हुई थी। घर में वह केवल फ्रेंच भाष ही बोलते थे थे सो इन की मात्र भाषा फ्रेंच ही बन गई। आगे चल कर वो लंदन जापान और बॉम्बे भी पढ़ने गए। इन के पिता रतन जी भाई, जो रिश्ते में जमशेद जी भाई के भतीजे लगते थे। जिन्होंने जमशेद जी भाई के बाद टाटा कारोबार की कमान अपने हाथ में संभल ली थी। । कुछ समय बितने पर की उनकी पत्नी चल बसी। रतनजी भाई अपने परिवार के साथ फ्रांस छोड़ कर हिंदुस्तान आगये। और अपने बेटे Air India के घर वापसी के हीरो जहांगीर को इंजीनिरिंग की पढ़ाई करने ग्रामर स्कूल में पड़ने लंदन भेज दिया।

समय यूँही बीतता चला गया तजुर्बा और Air India के घर वापसी एक प्रेम कहानी,के हीरो उम्र दोनों बढ़ते चले गए।
उनइस सौ तेरहानवे में उन्हें गुर्दों में शिकायत के चलते, वह जेनिवा के परिप अस्पताल में भर्ती हो गए। एक रोज़ Air India के घर वापसी की प्रेम कहानी,के हीरो ने इस संसार ओ दुनिया से अपनी अंतिम उड़ान भरी। उन्यासी साल का एक शानदार सफर तय कर हमेशा के लिए पेरिस के एक कब्र गाह में हमेशा हमेशां के लिए सो गए। शायद यही संसार का नियम है। नजदीक के करीबी उनका जिक्र करते हैं की वह अपने आखरी दिनों में कहा करते थे की मरना कितना सुख और आराम दायक है। वो जिए भी तो एक हीरो की तरह और मरे भी तो बड़े शान ओ सुकून के साथ  उन के दौर में टाटा की कई कम्पनियाँ ,कालेज,अस्पताल और बड़े रीसर्च सेंटरों की स्थापना हुई जो आज भी अपनी ईमानदारी और जहांगीर रतन जी भाई टाटा के नैतिक मूलयों के चिराग को रौशन कर रही हैं। जहाँगीर रतन जी टाटा का देश के प्रति उनका लगाव और लोगों के लिए प्रेम का आदर करते हुए , भारत सरकार ने Air India के घर वापसी के हीरो जहांगीर टाटा को हिंदुस्तान के सब से ऊँचे खिताबों से नवाज़ा है।


जे. आर .डी. टाटा भारत रतन से सम्मानित होते हुए

आज टाटा परिवार ने वारी Air India के घर वापसी के लिए सबसे ऊँची बोली लगा कर फिर एक मिसाल ए जमाना बना दी। शायद यह बड़ी कीमत जहांगीर रतन जी टाटा के अरमानों से बानी Air India के घर वापसी के लिए  शायद बहुत छोटी है।
जैसे फिल्म दिवार में श्री अमिताभ बच्चन जी का एक मशहूर डायलॉग है इस बात की पुष्टि करता है। जिसमे वह ज्यादा कीमत पर एक बिल्डिंग खरीदने पर बोलते हैं। आज से बीस बरस पहले मेरी मां ने यहाँ ईंटें उठाई थी। आज यह बिडिंग अपनी माँ को तोहफे के रूप में देने जारहा हूँ। किसकी मजाल थी जो हमको खरीद सकता ये यो हम खुद ही जो बिक गए हैं अपने खरीदार को देख कर।

किसी ने सही कहा है ये धरती गोल है हर चीज़ अपने वर्तुल को पूरा करती है।
मैं सजनी को अपने साजन से अड़सठ साल की जुदाई के बाद फिर मिलने पर टाटा परिवार को दिल से बधाई और शुभ कामनाएं देती हूँ ,पुरे विश्वास के साथ की Air India एयर इंडिया फिर अपना जलवा ऐ मुकाम हासिल करेगी और आसमान की बुलंदियों को छुएगी।

जंहाँगीर रतन जी और उन की माशूक Air India के  घर वापसी यह रोमांचक प्रेम कहानी यहाँ से फिर शुरू होती है। इस लम्बी जुदाई ने इस कहानी में बडी कसक पैदा कर दी है। एक रोमांच सा भर दिया है। भविषय में मुहब्बत को दिल से महसूस करने वाले, ब्लॉगर अपनी कलम से यकीनन इस हसीन Air India और टाटा की मुहब्बत की दास्तान को एक नए प्रेम ओ अंदाज़ में लिखें

आप सब का Air India के घर वापसी एक प्रेम कहानी को पड़ने के लिए आभार और प्रणाम ,                                             अगली रोचक कहानी पर आपका दिल से इंतज़ार है।
हिंदी में पहली बार लिखने और टूल का न पता होने से अनजाने में कोई गलती पर

में क्षमा का  प्रार्थी हूँ।     

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