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sham e qutub
Old Delhi Heritage Walk

Qutub at Night शाम ए कुतुब

Qutub at Night शाम ए कुतुब

Qutub at Night शाम ए कुतुब

Qutub at Night शाम ए कुतुब ,

आसमान से सूरज के रुकसत होते ही , कुतुब ने धीरे से जैसे शाम की लालिमा का आंचल ओढ लिया हो। शाम के पहले पहर की आहट ने शाम ए कुतुब में चिराग जैसे रौशन सा कर दिए हों। जैसे किसी तारों की बारात सा जग मग हो। दरवाज़ा ए दाखिल पर रौशनी की चमक मानो किसी अंधेरी रात में पूर्णिमा का चांद चमक रहा हो। दरवाज़ा ए आम ओ दहलीज मानो आप किसी रहीस महफिल में कदम रख रहे हों। चारों तरफ नजर का झिलमिलाता नज़ारा आपका स्वागत कर रहा हो। आपको कुछ खास ओ अमीरी का एहसास कराता है। शाम की नमी आपके बदन को थोड़ा छू कर शरारत सी करती सी लगती है। ये शाम ए कुतुब की ताज़ी जवान उम्र की हवा का झोंका है। आपके चेहरे पर रौनक सी आ जायेगी।

सराय की रौशन से दमकती गुम्बदें मानो किसी मौलवी के आजान की गूंज से भरी हो। सराय के कमरों की दहलीज पर धीमी धीमी रोशनी मानो किसी कारवां के देर से शहर पहुंचने का इंतजार कर रही हों।आगे बढ़ते काले शाह रास्ते किसी पुराने शहर का पता दे रहे हों।

ये Qutub at Night  शाम ए कुतुब की कूवत उल मस्जिद की जगमगाहट , में गुजरा हुआ वक्त और भी हसीन और जवान होने जैसा लगता है। दिल करता है तारीख की आगोश में बैठ जाने को जब की पता है तारीख गुजर चुकी है बस कुछ यादें इन पत्थरों में छोड़ गई है। जैन बौद्ध मंदिरों के नकाशीदार खंबे जैसे की धूनी लगाए मौन साधु कोई मंत्र जाप कर रहे हैं।

ये Qutub at Night  शाम ए कुतुब की कूवत उल मस्जिद की जगमगाहट , में गुजरा हुआ वक्त और भी हसीन और जवान होने जैसा लगता है। दिल करता है तारीख की आगोश में बैठ जाने को जब की पता है तारीख गुजर चुकी है बस कुछ यादें इन पत्थरों में छोड़ गई है। जैन बौद्ध मंदिरों के नकाशीदार खंबे जैसे की धूनी लगाए मौन साधु कोई मंत्र जाप कर रहे हैं।

चिरागों में खुदा मुझे Qutub at Night शाम ए कुतुब की ऊंची और सुडौल मेहराबों की खूबसूरती मानो देखते ही बनती हो। शाम ए कुतुब के रौशन माफ ओ बख्शे ये कुरान की पाक आयतें भी किसी मीठी रूबाइयों सी लग रही हैं। या तो नजरों को धोखा हो रहा है या दिल में कोई गुबार सा उठ रहा है। मस्जिद के झरोखों मे आराम तलब करते कबूतरों की गुड गुगुहाहट किसी मौलवी के कलमो के पढ़ने की गुन गुनाहट सी जान पड़ रही है। भले समझ कुछ नही आराहा पर शाम ए कुतुब में संगीत सा भर रही है। अचानक किसी कबूतर की फड़फड़ाहट किताब का कोई पन्ना पलटने का एहसास करवाता है।

सुलतान इल्तुशमिश के मकबरे में रौशनी थोड़ा कम है। या यूं समझा लो की रोशनी अपनी हद के दायरे में है। कब्र ने अंधेरे की चादर ओढ़ सी रखी है। मकबरे में खामोशी का कालीन बिछा रखा है। सुलतान दरबार और आवाम से तखलिया कर चुके हैं। अब यहां से गुजरना माना है। सुलतान शबा खैर की आगोश में आराम फरमा रहे हैं। चौकी दारों का सख्त पहरा है यहां। दरोगा जैसे खड़े काले पेड़ों पर बैठे उलूओं की चमकती आंखें मानो आप कैमरे की नज़र में हो।

सामने यह पुराना मदरसा शाम ए कुतुब में नन्हे चिरागों की रौशनी से रौशन है। मदरसे से सब जा चुके हैं। दीवार बाहर से गुजरती गाड़ियों की रौशनी में पेड़ की घूमती परछाई जैसे कोई बुजुर्ग किसी लाठी को लेकर यहां से वहां टहल रहा हो।

वो मदरसे से सटा मकबरा सुलतान अलाउद्दीन सिकंदर ए सानी का है। इस Qutub at Night  शाम ए कुतुब के हसीन मंजर में उनके मकबरे का खौफ नाक अंधेरा , सुलतान के स्वभाव पर जच सा रहा है। आप निगाहें रू बा रु ना करें , अदब की हद में रहें। दूर अंधेरे में आते चौकीदार की लंबी परछाई भी मन में दहशत का माहोल पैदा करती है। ऊंचा लंबे बालों वाला काले लिबाज़ में सुलतान अलाउद्दीन की आवाज़ आपके कानों में सुनाई दे सकती है।

Qutub at Night शाम ए कुतुब का सबसे हसीन और खूबसूरत मेजबान खुद कुतुब मीनार अपने खूबसूरत सुर्ख चेहरे पर चमकते गोटे दार दुपट्टे को ओढ़े, अपनी काली नशीली आंखों से आपको सलाम करती है। उड़ते चमगादड़ों की झनझनाहट भरी आवाजें मीनार खुद पर लिखी सुलतानी फरमानों से ना फरमानी करती हुई , मानो पैरों में पायल की आवाज से आपके दिल के सुर से सुर मिला रही हो।

अभी ना जाइए मीनार को छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं। यहां आप किसी बिछड़े पत्थर पर बैठ कर थोड़ी देर मीनार से दो प्यार भरी बातें करना चाहेंगे। तो बैठ ही जाओ हुजूर ये शाम ए कुतुब की महफिल फिर कहां। थोड़ा प्यार से देखिए मीनार आपसे घंटों खुद ब खुद दुनिया जहान से बेखबर सभी हदों से परे आपसे मुहब्बत भरी बातें करती है। इस सजी धजी हसीन मीनार के पास बैठ कर गुफ्तगू तो कीजिए।

यहां का दीवाना माहोल , चारों ओर Qutub at Night  शाम ए कुतुब की रोशनी में भरा यह खूबसूरत मंजर आपको अपनी पनाहों में गिरफ्तार करता है। आप अपने दिल में मीनार की खूबसूरती का हसीन जलवा ओ हुस्न कैद किए बिना इस महफिल से रिहा नहीं हो सकते।

दिल्ली शहर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल- कुतुब मीनार की खूबसूरती को एक नया आयाम मिला है। यह रात को रोशनी से जगमगाता है और प्रकाश की धधकती चमक इस के सौंदर्य को चार चांद लगाती है। यह पेरिस के एफिल टावर लंदन के बिग बेन से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत नजारा देखने लायक होता है। मेरे साथ हेरिटेज वॉक आपको कुतुब परिसर के अंदर ले कर जाएगा और आपको कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स के अन्य इतिहासिक स्मारकों की सौंदर्य कला, वास्तु की कई रोमाचकारी कहानियां सुनाउगी। यह एक अलग तरह का हेरिटेज वॉक है, जो अब तक का पहला है। मेरे साथ सैर में शामिल हों, और एक ऐसा अनुभव प्राप्त करें जो आपको दिल्ली और इसकी हलचल को भूला दे और आपको बहरवीं शताब्दी के उस समय पर वापस ले जाए जब दिल्ली सल्तनत हुआ करती थी।

आप में से कई लोगों ने किसी समय कुतुब मीनार की यात्रा की होगी। लेकिन अब, हमारी विरासत का यह प्रतिष्ठित टुकड़ा रूपांतरित हो गया है। रात में कुतुब मीनार पर रोशनी के प्रभाव को समझाने का सबसे अच्छा तरीका कुछ दृश्यों को देखना है। इन शामों में, क़ुतुब एक विशाल स्तंभ की तरह दिखता है जो सोने से बना होता है। विश्वास नहीं हो रहा था कि रोशनी 13वीं सदी के इस मकबरे के चरित्र को बदल सकती है। 

आइएगा

फुरसत निकाल कर शाम ए कुतुब की महफिल में।

लौटते वक्त दिल नही पाओगे अपने सीने में।

आपका इंतजार करती हूं

एक शाम ए कुतुब   Qutub at Night

खुदा हाफ़िज़

 

Qutub at Night शाम ए कुतुब ,

Enjoy an Interesting Heritage Walk at Night Call Harry +919811500757

Best Tourist Guide in Delhi.

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